आखिरी बारिश |Aakhri baarish| – 1
एपिसोड 1 — एक अनजान मुलाकात
शहर में सुबह से बारिश हो रही थी। आसमान में छाए काले बादलों के बीच लोग अपनी मंजिल तक पहुँचने की जल्दी में थे। लेकिन इसी भीड़ में एक लड़की ऐसी भी थी, जिसे बारिश से ज्यादा अपने काम की चिंता थी।
नंदिनी शर्मा, एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की, हाथ में फाइल लिए मल्होत्रा डायमंड्स के ऑफिस में दाखिल हुई।
“सात मिनट देर से आई हो!” रिसेप्शन पर बैठी सीमा ने कहा।
नंदिनी मुस्कराई। “रास्ते में एक बुजुर्ग की गाड़ी खराब हो गई थी। उनकी मदद कर रही थी।”
“तुम्हें हर किसी की मदद करनी जरूरी लगती है?”
“नहीं, दीदी। लेकिन जब किसी की मदद कर सकती हूँ, तो मुँह फेरकर कैसे निकल जाऊँ?”
तभी पीछे से आवाज आई, “यहाँ समाजसेवा नहीं, काम करने के पैसे मिलते हैं!”
यह कंपनी का मैनेजर विक्रम था।
नंदिनी ने शांत स्वर में कहा, “जी सर, और मैं अपना काम पूरा करके ही आई हूँ।”
विक्रम उसे घूरता हुआ चला गया।
उसे क्या पता था कि आज उसकी शिकायत सीधे कंपनी के मालिक तक पहुँचने वाली थी।
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दूसरी ओर, मल्होत्रा हाउस में राजेंद्र मल्होत्रा अपने दोनों छोटे बच्चों, विवान और रिया, को समझाने की कोशिश कर रहे थे।
“तुम दोनों को अपने बड़े भाई आर्यन से कुछ सीखना चाहिए।”
विवान हँस पड़ा। “डैड, भैया को काम के अलावा कुछ दिखाई ही नहीं देता।”
राजेंद्र की मुस्कान गायब हो गई।
“बस यही चिंता है मुझे। वह सबकी जिम्मेदारी उठाता है, लेकिन अपनी जिंदगी के बारे में नहीं सोचता।”
उनकी आँखों में एक अनकहा डर था। पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। डॉक्टर ने आराम करने की सलाह दी थी, लेकिन उनके मन में अपने बेटे की शादी देखने की इच्छा गहरी होती जा रही थी।
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ऑफिस में आर्यन मल्होत्रा अपनी मेज पर एक रिपोर्ट देख रहा था, तभी नंदिनी को बुलाया गया।
“इस रिपोर्ट में तीन हीरों का हिसाब गलत बताया गया है,” आर्यन ने कहा।
नंदिनी ने तुरंत जवाब दिया, “सर, हिसाब सही है। मैंने सभी रसीदें जाँची हैं।”
“और अगर तुम गलत हुईं?”
“तो जिम्मेदारी मेरी होगी। लेकिन अगर मैं सही हुई, तो उम्मीद है कि मेरी बात भी सुनी जाएगी।”
आर्यन कुछ पल उसे देखता रहा। इतनी बड़ी कंपनी में बहुत कम लोग उससे इतनी बेझिझक बात करते थे।
जाँच हुई और नंदिनी सही निकली।
“तुम अपनी बात रखने से डरती नहीं हो?” आर्यन ने पूछा।
“गलत होने से डरती हूँ, सर। सच बोलने से नहीं।”
आर्यन के होंठों पर हल्की मुस्कान आ गई।
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शाम को नंदिनी को फोन आया। उसके पिता की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया था।
वह घबराकर बारिश में सड़क किनारे खड़ी हो गई।
तभी एक काली कार उसके सामने रुकी।
खिड़की खुली। अंदर आर्यन था।
“नंदिनी, क्या हुआ?”
“सर, मेरे पापा अस्पताल में हैं। मुझे वहाँ पहुँचना है।”
आर्यन ने तुरंत दरवाजा खोल दिया।
“बैठो। मैं तुम्हें छोड़ देता हूँ।”
नंदिनी की आँखों में आँसू आ गए।
“धन्यवाद, सर।”
कार बारिश से भीगी सड़क पर आगे बढ़ गई। दोनों खामोश थे, लेकिन उस छोटी-सी यात्रा ने उनके बीच एक अनजाना रिश्ता शुरू कर दिया था।
उन्हें नहीं पता था कि एक दिन यही दो अजनबी शादी के बंधन में बँधेंगे।
और फिर एक दिन ऐसी ही बारिश में अलग-अलग रास्तों पर चलने को मजबूर होंगे।
क्योंकि कुछ मुलाकातें सिर्फ कहानी शुरू करने आती हैं… और कुछ बिछड़ने की वजह बन जाती हैं।
जारी रहेगा…
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